Wednesday, March 14, 2007

My Right My Fight

It can never be easier to file an RTI Application. http://www.hindu.com/2007/03/14/stories/2007031419010200.htm
CHENNAI: `5th Pillar', an organisation that aims at mobilising volunteers to fight corruption, will launch Right to information (RTI) Service Centres on Sunday at a function to be held at Kamaraj memorial hall in Teynampet. Vijay Anand, president of Washington Tamil Sangam, who is currently in the city, will head 5th Pillar Right to Information Act Service Centres in India. M.B. Nirmal, Founder of 5th Pillar International, explained how individual citizens have been using the RTI Act effectively to increase public accountability of government organisations. He told reporters on Tuesday that people could send their request to the RTI Service Centre for further processing. Volunteers would reply to their queries, draft a petition and return it to them. The petitioner would have to affix a Rs.10 court fee stamp and take it to the relevant department. The organisation's website is: www.5thpillar.org.
more information on RTI is available here, here, here, here

Thursday, March 08, 2007

Female Motorcycle Mechanic

BBCHindi.com

वैसे तो आज महिलाएँ हर वो काम कर रही हैं जो पुरुष करते हैं पर पुरुष प्रधान भारतीय समाज में कुछ ऐसे काम हैं जो आज भी सिर्फ आदमी ही करते नज़र आते हैं.
मिसाल के तौर पर गाड़ियों की मरम्मत का काम.

शायद ही आपका वास्ता कभी महिला मैकेनिक से पड़ा हो और वो भी सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में. पर सौराष्ट्र के सुरेन्द्रनगर ज़िले के चामराज गांव की रत्नाबेन जादव दोपहिया रिपेयरिंग की एक दुकान चला रही हैं.

रत्नाबेन की उम्र 60 वर्ष से ज़्यादा है और उनकी विशेषता मोटरसाइकिल ठीक करना है.

वैसे तो वो हर गाड़ी में पंक्चर लगा लेती हैं. चाहे वो जीप, बस ट्रक या फिर बड़ी गाड़ियाँ.

उनका कहना है “मोटरसाइकिल तो मैं पूरी तरह से ठीक कर लेती हूँ और बाकी गाड़ियों की भी जानकारी रखती हूँ पर मेरे पास उनको ठीक करने के लिए औज़ार नहीं है और ग़रीबी इतनी है कि कोई भी संस्था मुझे लोन नहीं देती.”

महिला शक्ति

रत्नाबेन ने यह काम अपने पति हरिभाई से सीखा.


मुझे गर्व है कि आज मैं यह काम कर रही हूँ, जो कभी सिर्फ़ मर्द करते थे


रत्नाबेन

वो हरिभाई की दूसरी पत्नी हैं और उनकी कोई औलाद नहीं है.

आज हरीभाई बीमारी की वजह से काम नहीं कर सकते तो रत्नाबेन घर चला रही हैं.

हरिभाई अपनी पहली पत्नी से हुए बच्चे के पास जाना नहीं चाहते, जो कि अहमदाबाद रहते हैं.

वो कहते हैं, “बच्चे कहते हैं कि यहाँ आ जाओ पर हम वहाँ जा कर क्या करेंगे. मुझे इसकी चिंता रहती है कि वो इसके साथ कैसा बर्ताव करेंगे. अब तो हम यहीं पर रहना चाहते हैं. यह काम करती है और मैं बैठा रहता हूँ. इसकी वजह से मेरा बुढ़ापा सुधर गया है.”

लेकिन क्या एक महिला का मैकेनिक बन जाना अलग सा नहीं है?

रत्नाबेन कहती हैं “पहले तो लोग मुझे बड़े अचंभे से देखते थे कि आख़िर एक औरत कैसे गाड़ी ठीक करेगी और सवाल पूछते थे. कुछ तो अभी भी पूछते हैं पर मैं उन्हें सामने खाट पर बैठेने को कह कर अपने काम में जुट जाती हूँ.”


पति हरिभाई ने सिखाया काम करना

गांव से गुज़रते हुए किसी की भी गाड़ी ख़राब होती है तो वो उसे रत्नाबेन के पास छोड़ कर अपने काम पर चल देता है और जब तक वो वापस आता है गाड़ी ठीक हो चुकी होती है.

पर लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं? इसी गाँव के जगदीश का कहना है, "इन्हें यह काम करते देख दुख होता है. अगर किसी को ये उम्र में ऐसा करना पड़े तो दुख तो होगा ही ना. मैं इन्हें 20 साल से जानता हूँ."

जगदीश अकसर रत्नाबेन की छोटी मोटी काम में मदद करते हैं. पर रत्नाबेन का मानना है, "मुझे गर्व है कि आज मैं यह काम कर रही हूँ, जो कभी सिर्फ़ मर्द करते थे. मुझे थोड़ा पैसा चाहिए. मुझे धंधे तो आगे बढ़ाना है."

रत्नाबेन आज किसी बडे़ शहर में होती तो काफी ख्याति पा चुकी होती. पर ये ग्रामीण भारत में रह रही एक महिला हैं जो महिला शक्ति को एक अलग परिभाषा दे रही हैं.

Tuesday, March 06, 2007

Designing Change

An Interesting read Designing Change: "Net"

Monday, March 05, 2007

Carbide's poisons still killing in Bhopal

Sunday, March 04, 2007

Lunar Eclipse: March 3-4, 2007


Must you wanna experience it animated, go to http://bighugelabs.com/flickr/onblack.php?id=410182783&size=Large